Baccho ko mobile se door kaise rakhe |100% असरदार तरीका। आसान उपाय जरूर आजमाए।

बच्चो को मोबाइल से दूर कैसे रखे :

Baccho ko mobile se kaise door rakhe
Baccho ko mobile se kaise door rakhe

2021 में इस पोस्ट को पढ़ रहे सभी माता-पिता,  भाई-बहन ही इस बात की गहराई को समझेंगे की हमारे माता-पिता ही वो आखिरी पीढ़ी/Generation है, जिन्हे मोबाइल कंप्यूटर बहुत कम या बिलकुल चलाना नहीं आता और न ही वो इन सब की परवाह करते है। Baccho ko mobile se door kaise rakhe

पिछले 30-40 साल के दौरान ही भारत में मोबाइल इंटरनेट का चलन तेज़ी से बढ़ा है और आज के समय न सिर्फ हम बल्कि आने वाली अगली जनरेशन यानि की  हमारे बच्चे भी छोटी उम्र से ही इसके चपेट में आते जा रहे है। मोबाइल/कम्प्यूटर का अधिक इस्तेमाल हमेशा ही ख़राब रहा है। इस बात से हम सब वाकिफ है, सिर्फ बच्चो को छोड़ कर। 

मेरा निवेदन है कि पोस्ट को पूरा पढ़े ताकि Step by Step आप चीज़ों को समझ सके, फिर भी अगर आपको सिर्फ उपाय जानना है तो टेबल ऑफ कंटेंट में जाकर टॉपिक सेलेक्ट करे। आइये पहले जानते है की :

क्यों लगती है बच्चों को मोबाइल की लत? Mobile-addiction ki shuruat.

mobile addiction ki shuruaat
mobile addiction ki shuruaat
अगर आप इसी दुनिया से है तो इस बात से इंकार नहीं कर सकते की हमारे पूर्वज कभी जंगल में रहा करते थे बिना मोबाइल टीवी के और आज भी इंसान को छोड़ कर सभी जीव जंगल में ही रहते है नेचर माता के करीब। हर जीव का बच्चा बोलने-समझने से पहले जो भी सीखता है अपने माता-पिता और बड़ो को देख कर ही सीखता है। ऐसे में हम ही जाने-अनजाने में ही बच्चो को मोबाइल की आदत लगा देते है।

आजकल साल भर के बच्चे भी  टेलीविजन या मोबाइल से चिपकना शुरू कर देते हैं। जब खिलौनों की बात आती है तो Mobile बच्चो का Favorite है उस खिलौने के खेल जिन्हे बिना मेहनत खेला जाता है उनके पसंदीदा है।  आप ही सोचिये अगर पैसा कमाने के लिए आपको कोई सामान बनाना होता तो आप उसे बेहतर से बेहतर से बनाने की कोशिश करते वही हाल मोबाइल और उनमे होने application  का है। मोबाइल कम्पनिया ऐसी ही चीज़े बनाती है जिनका उपयोग लोग ज्यादा से ज्यादा करे , न सिर्फ मोबाइल कम्पनिया बल्कि मोबाइल में इस्तेमाल होने वाले वो सारे Apps, Games, Videos बनाने वाले भी इस लिस्ट में शामिल है। 

मोबाइल का सबसे खास फंक्शन होता है स्क्रॉल करना फिर चाहे फेसबुक/Facebook हो , इंस्टाग्राम/Instagram हो या यूट्यूब/Youtube, हर बार नीचे स्क्रॉल/Scroll करने पर दुनिया भर की अलग अलग चीज़े हमे दिखती जाती है। जितना आप मोबाइल को नही जानते उससे ज्यादा आपका बच्चा जानता होगा और जितना बच्चे मोबाइल को नही जानते उससे ज्यादा मोबाइल आपके बच्चे को जानता है । यही वजह हर बार हमारे ब्राउज़िंग हिस्ट्री (Browsing-history) और Interest के अनुसार ही न खत्म होने वाली चीज़े स्क्रॉल करने पर दिखती जाती है। बस इतना काफी है किसी चीज़ की लत / आदत लगाने के लिये।

मोबाइल का बच्चों पर पड़ता दुष्प्रभाव। बच्चों को मोबाइल देने से क्या होता है। मोबाइल कितना हानिकारक है? 

आपको पता भी नहीं होता कि मोबाइल पर दिखाई जा रही चीजों (Content) को बच्चा किस मानसिकता से समझ रहा है,कभी कोई खूबसूरत दुनिया बनाने की बात कर रहा होता है, तो अगले ही पल कोई उसे बम से उड़ाने की बाते। 

हम सबका दिमाग किसी एक बात पर फोकस रहे उसे फेसबुक ने इसे Re-spawn टाइम कहा है ।जहा 2011 से पहले ये समय 9 Second का था वही अब घट कर 6 Second का रह गया है। बच्चो के मामले में ये और भी कम है आसान शब्दो मे कहे तो हर 3 sec में आपके बच्चे के मन मे एक नया विचार आ जाता है अब आप ही बताइए फोकस करना या कंसंट्रेशन पावर क्यों न कम हो उन सबकी जो मोबाइल में घुसे रहते है। 

इसके अलावा जो नुकसान है वो आम तौर पर सभी जानते है जैसे :

  •  Nomophobia (No Mobile Phobia) मोबाइल के न होने का डर 
  • आंखों का जल्दी खराब होना जिसकी वजह से छोटी उम्र में ही चस्मा लग जाता है।
  • मोबाइल से निकलने वाली रेडिएशन तरंगो का  सेहत पर असर जो कि लंबे समय मे अपना असर दिखता है। कैंसर जैसी गंभीर समस्या इसकी देन हो सकती है।
  • मानसिक विकार उतपन्न होना जिसमे गुस्सा चिड़चिड़ापन और ज़िद्द भी शामिल है।
  • बच्चो में अकेला और गुमसुम रहने की आदत।

मेरा मकसद आपको डरना बिल्कुल नही है लेकिन जो सच है उससे हुम् मुह नही फेर सकते खासकर तब जब बात हमारे बच्चो की हो आने वाली जनरेशन की हो जिनके सुनहरे भविश्व की कामना हम करते है उन्हें ऐसी आदतों से बचना ही हमारा कर्तव्य है ताकि आने वाली पीढ़ी हमसे ज्यादा होशियार और सेहतमंद हो सके। 

बच्चों का मोबाइल कैसे छुड़ाएं। मोबाइल की लत छुड़ाने के उपाय। Tips To Keep Child Away From Mobile. 

baccho ko Bahar khelne bheje
baccho ko bahar khelne bheje

यूँ तो बहुत से छोटे छोटे कदम है जिनसे आप बच्चो पर मोबाइल की आदत को कम कर सकते है जैसे :

  1. खुद से शुरुआत करें- बच्चो सबसे अच्छी कॉपी अपने माता-पिता की ही करते है, ऐसे में सबसे पहले जरुरी की अपनी कुछ आदतों को बदले जिनमे मोबाइल का थोड़े थोड़े में समय में चलना भी शामिल है। 
  2. अचानक से मोबाइल पर रोक न लगाए - डाटने और जोर जबरजस्ती करने पर बच्चे के में गलत विचार घर कर लेंगे, ऐसे में बेहतर ये होगा धीरे धीरे मोबाइल से दूरी बनाये और कुछ ऐसे काम में बच्चो को शामिल करे जिससे उन्हें एहसास हो जीवन में मोबाइल से बेहतर भी कुछ जरुरी काम होते है। 
  3. बच्चो को समझे और खेल-कूद का तरीका बदले- शायद ही कोई बच्चा होगा जिसे खेल कूद न पसंद हो इसके अलावा हर बच्चे में कोई न कोई टैलेंट छिपा होता है। जरुरत है अपने बच्चो के साथ समय बिताये और उनके टैलेंट को पहचान कर खेल सिखाये , खेल सिर्फ वो नहीं जिसे खेला जाए। पेंटिंग करना, chess ,कहानिया-कविता करना यहाँ तक की डांस या सिंगिंग जैसे इंटरेस्ट भी प्रैक्टिस के साथ निखर खर खेल ही बन जाते है।  
  4. अकेला न फील कराये- बच्चे जो इस दुनिया में हर दिन कुछ नया देखते और सुनते है , शाम को समय निकाल कर उनसे पूछे की आज का दिन कैसा रहा, और अपने दिन के बारे में भी खुल कर बताये। इससे उन्हें बहुत हिम्मत मिलती है की उनका भी हाल चाल लेने वाला है। 
  5. कहानिया किसे नहीं अच्छी लगती- रात को सोते क़्क्त कहानियो के माध्यम से आप बच्चो को अच्छी सीख दे सकते है , अच्छे-बुरे में फर्क बता सकते है और उन्हें सकारात्मक सोच के साथ कुछ जिज्ञासा भरे सवाल भी कर सकते है।  आप देखेंगे की अगली बार बच्चा उत्सुक होगा आपको सुनने और नयी चीज़े जानने के लिए। 
  6. खाली दिमाग सैतान का घर - ये हम सब जानते है और ये भी बच्चे ऊर्जा से भरपूर होते है , ऐसे में उन्हें खाली न बैठने दे , किसी न किसी काम में व्यस्त रखे और समय की अहमियत का एहसास करवाए। ताकि उन्हें खुद किसी गैर-जरुरी काम में अपनी ऊर्जा बर्बाद करने की आदत न लगे। 
    baccho ke saath samay bitaye
    baccho ke saath samay bitaye 

  7. दोस्ती/Friendship - वैसे तो सबसे शुरुआती दोस्त बच्चो के माता-पिता ही होते है लेकिन आगे चल कर बच्चे अपनी उम्र के अच्छे दोस्त बनाये उसकी सीख भी दीजिये, उन्हें फर्क समझाये जिम्मेदारी उठाने वाले और समय बर्बाद करने वाले लोगो के बीच का।  
  8. बच्चे आपके लेकिन हम सब प्रकृति के बच्चे है - इस बात से हर किसी को सहमत होना चाहिए और बच्चो को भी बताये Nature-माता के बारे जिससे धरती की घास पर नंगे पेअर दौड़ने का मजा वो सहज हो कर ले पाए। शावर में सब नहाते है लेकिन जादू जैसी लगने वाली बारिश को भी खुल कर एन्जॉय कर सके। उन्हें बताये की बिना तार और बिना किसी उपकरण के कैसे इतने बड़े बड़े ग्रह (Planet) हवा में लटके हुए घूम रहे है। इन सब बातो से बच्चो में प्रकृति के प्रति जागरूकता, सम्मान, आभार और जिज्ञासा बढ़ेगी। 

निष्कर्ष/CONCLUSION

ये सभी उपाय असल में उपाय नहीं, यही सच है जिसे हम सब को स्वीकारना चाहिए और जिम्मेदारी पूर्वक इसका ज्ञान आने वाली पीढ़ी/Generation को देना चाहिए। साथ ही हर माता-पिता को सुनिश्चित करना चाहिए कि वो अपने बच्चे को क्या दिखाना-सीखना चाहते है। आप जीवन के सभी सकारात्मक और अलग अलग प्रकार की चीज़ों, गतिविधयों से उनका सामना करवाये, यह सकारात्मक का मतलब सही या गलत बिल्कुल नही , बस जीवन जैसा है उसे उस रूप में दिखाए। 

प्रकृति के बीच रहना , खेल कूद बच्चो सारीरिक और मानसिक रूप से सेहतमंद और संतुलित बनाता है । बजाय विडियोगेम लाकर देने के आप उसे पेड़ में चढ़ना सीखा सकते है आउटडोर गेम्स खिलवा सकते है , और इन सब मे सबसे हम रोले आपका होगा , आपको भी बच्चो के साथ बच्चा बनकर खेलना होगा वो जैसा व्यवहार आपको करता देखेंगे वही खुद भी करना सीखेंगे । 

इसके अतिरकित, हम कितने समय के लिए इस दुनिया मे आये है ,समय का क्या महत्व है, अगर इन सारी बातों को बच्चे को रूबरू कराया जाए तो उसे खुद इतनी समझ आ जायेगी की टेक्नॉलाजि का उपयोग कुछ पल की खुशी के लिये नही बल्कि उससे कुछ सीख कर आगे बढ़ने के लिये किया जाता है।

इस पोस्ट को यही खत्म करते हुए मैं आप सबसे अलविदा लेता हूं। कही कोई गलती या सुधार हो तो जरूर बताएं और अगर जानकारी पसन्द आयी हो तो अपने परिवार दोस्तो में जरूर Share करे। Hindiansite और मैं आशा करते हैं कि आपका और आपके बच्चो का भविश्व उज्वल हो। शानदार जबरजस्त जिंदाबाद हो।

FAQ/आमतौर पर पूछे जाने वाले सवाल:

1. बच्चो को मोबाइल किस उम्र में दे?

  • बच्चे को मिलने वाली और हमेशा उसके साथ रहने वाली पहली और आखिरी चीज़ है उसका शरीर, उसका दिमाग। जब आपको लगने लगे कि अब वो खुद को अच्छी तरह समझने लगा है, अपने अच्छे कामो का निर्णय वो खुद से लेने लगा है तभी बच्चो को मोबाइल देना चाहिए। 

2. Mobile addiction के लक्षण क्या है? What are symptoms of Mobile addiction in child?

  • अनिद्रा/Insomnia 
  • कार्य को पूर्ण करने में असमर्थता।Distraction 
  • तनाव और बेचैनी।Stress 
  • संबंध तनाव। Relationship stress
  • आंख पर जोर।Eye strain 
  • गर्दन में दर्द। Neck pain 
  • सामाजिक चिंता। Social Anxiety 
  • पलायनवादी व्यवहार। Escapist 

3. मोबाइल का इस्तेमाल दिन में कितने देर तक सही है ?

  • मोबाइल का इस्तेमाल अगर 4-5 घंटे तक हो रहा है तो बुरा है।   

पोस्ट को यही समाप्त करते हुए हम आपसे विदा लेते है और उम्मीद करते है "Baccho ko mobile se door kaise rakhe | बच्चो को मोबाइल से दूर कैसे रखे" का यह पोस्ट आपके काम आया होगा। किसी प्रकार की गलती या सुधार होने पर सूचित करे एवं इस जरुरी जानकारी को अपने दोस्तों और परिवार में जरूर शेयर करें। Hindiansite आपके परिवार की अच्छी सेहत और स्वास्थ की कामना करता है। 

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