ज़िदगी हो तो ऐसी हो, जिन्दा तो बोकरी के बाल भी हैं।

राम-सलाम दोस्तो,

ज़िदगी हो तो ऐसी हो , जिन्दा तो बोकरी के बाल भी हैं
ज़िदगी हो तो ऐसी हो , जिन्दा तो बोकरी के बाल भी हैं 
टाइटल में वही फेमस डायलॉग जिसे आप सब ने मिर्जापुर मे गुड्डू पंडित के द्वारा सुना होगा लेकिन थोड़ा फेर बदल के साथ। असल डायलॉग यहाँ लिखना मुझे उचित नही लगा इसलिए बोकरी (Goat) को बीच मे लाना पड़ा । ख़ैर डायलॉग को रखते है साइड में और भावनाओं की ओर चलते है ।


भावनाएं ये कहती हैं कि, भले ही हम खुद को कितना ही महान या कमजोर क्यों न मान ले लेकिन हमारे आसपास, हमारे समाज मे ही ऐसे लोग जरूर होते हैं जिनकी तरह हम बनने की चाहत करते हैं। उन्हें आइडल ( Idol ) कहें या इंस्पिरेशन (Inspiration) बात एक ही है । उदहारण के लिए अगर मुझे सिंगिंग पसन्द है तो अरिजीत , साइंस में दिलचस्पी है तो अब्दुल कलाम या आज के जमाने के एलोन मस्क

ऐसे महान लोगो की वजह से ही हमे जीवन मे आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है, न सिर्फ इसलिये क्योकि ये महान काम कर रहे है बल्कि इसलिये भी की कभी ये भी हमारी उम्र के थे, हमारे जैसी सोच रखते थे और आज उसी सोच को हकीकत में बदलकर नई उचाइयां हासिल कर रहे हैं। 

सीखने वाली बात बहुत सी इनमे। जिसने भी उनके जीवन से प्रेरणा ली और उनके संघर्ष को समझा वो भी सफल होने की राह पर बढ़ चले। मेरे पास ऐसे बहुत से उदाहरण है, जिनसे साबित हो जाएगा कि आपको सफल होने के लिए बस आपका होना जरूरी है, फिर चाहे परिस्थिति कैसी भी हो , चाहे आपके आइडल ( Idol ) आपके पास हो या ना हो । 

मुझे उम्मीद आपने एकलव्य के बारे में जरूर सुना और पढ़ा होगा, एक मेरे मोहल्ले में भी एक लव्य है, लेकिन गधा है वो। 

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एकलव्य बोले तो महाभारत वाला एकलव्य, जिसने सिर्फ अपने गुरु की मूर्ति बनाकर सबसे बेहतरीन तीर बाज़ बन गया। बाद में गुरु दक्षिणा में अंगूठा देना पड़ा वो दूसरी कहानी है लेकिन निष्ठा देखो बन्दे की , उसने जिसे गुरु माना था बस दिल से मान ही लिया था। फिर क्या अंगूठा, क्या कैरियर, सब अर्पित अगर गुरु ने मांगा है तो । 

आज के टाइम तो लड़के एक्स्ट्रा एडवांस हो रहे फीस भी नही देते ट्यूशन की, खैर सब ऐसे नही होते वैसे ही जैसे पाचो उंगलिया बराबर नही होती ।

मैं बात कर रहा था सफल होने की, तो सीखने वाली बात ये है की हौसला, सच्ची निष्ठा और मेहनत इंसान से कुछ भी करवा सकती है फिर चाहे अंतरिक्ष मे टेस्ला ( Tesla ) की कार प्लेट पर मेड बाई ह्यूमन (Made by Human) लिख कर लांच करना ही क्यों न हो।

दोस्तो ज्ञान तो सब देते है कि खुद पर यकीन करो, भरोसा करो लेकिन क्या आपने कभी ये सोचा है कि, हमारे अब तक के जीवन में यकीन करने से क्या-क्या हुआ है। याद करिये जब आपने यकीन किया था कि आज के बाद सिगग्रेट ( Cigarette ) नही पिऊंगा या कल से टाइम पर सो जाऊंगा सुबह जल्दी उठूंगा आदि आदि ।

कुछु हुआ ? 

नही हुआ होगा क्योंकि अगर सिर्फ यकीन करने, हौसला रखने, हिम्मत रखने और ऊंची उची सोच रखने से कुछ होता तो आज मैं किसी दूसरी पृथ्वी में अपनी तीसरी बीवी के साथ चौथी सालगिरह मना रहा होता। 

करने से होगा, और ऐसे होगा जिसके होने का एहसास भी न हो आपको, न थकान , न भूक न प्यास बस आप और आपकी मेहनत होगी वहां। जब कोई काम खुद के जीने मरने से बड़ा हो जाये तब चमत्कार सुनने और देखने को मिलते हैं।

आपने सुना ही होगा सैनिक 3 दिन तक बिना खाना पानी के लड़ता रहा और जीत के बाद ही सहीद हो गया, जैसे एक राजपूत वीर "जुंझार" जो मुगलो से लड़ते वक्त शीश/सर कटने के बाद भी घंटो लड़ते रहे, आज उनका सिर बाड़मेर में है, जहा छोटा मंदिर हैं, और धड़ पाकिस्तान में है., क्या ये चमत्कार नही। 

ऐसे लोग जिनकी किसी खास काम को करने की इक्छा-शक्ति (Will power) इतनी मजबूत और तीव्र (Strong) हो उनके लिए मौत को भी इन्तेज़ार करना पड़ता है। वो सब मौत से भी कहते है तू रुक जरा, ठहर, सबर कर, अभी मेरा काम बाकी है। 

कैसे थोड़े ( Little -Little ) से शुरू करके लोग महान शराबी बन जाते और उन्हें खुद पता नही चलता, कैसे दिन में एक सिगरेट पीने वाले पूरा डिब्बा खत्म करने लगते है और उन्हें एहसास नही होता, कैसे हम थोड़ी देर मोबाइल चला लूँ कहकर पूरा दिन मोबाइल पर गुजरने लगते है और पता ही नही लगता। ये चमत्कार नही तो और क्या है कोई बताये। 

क्या हमारी इस दुनिया मे कोई और जीव सोच कर/कल्पना कर  उसे हकीकत में इतनी अच्छी तरह करने में सक्षम है ? 

सोच कुछ भी हो, सफल होने के लिये उसपर लगतार काम करना जरूरी है। वेसे ही जैसे सचिन तेन्दुलजर किसी गेंद या गोला बोलो को ऐसे मारता है जैसा कोई और नही मारता। जैसे एलोन मस्क, अब्दुल कलाम या अरिजीत सिंह । सब अपने काम मे इतने अच्छे ढंग से करते है कि वो ही शिखर (Peak) पर  है अपने पसंद/Interest के छेत्र में। बाकी आपने ये तो बचपन मे ही जान लिया होगा कि "Practice Makes a Man Perfect"

हमारी पसंद का छेत्र अलग अलग हो सकता है, लेकिन हम इंसान तो एक ही है न जी इस दुनिया मे। और सिर्फ इंसान के पास ही चमत्कार करने की शक्ति है। ऐसा मेरा मानना है। 

सोच कर हकीकत में बदलना आज से ही शुरू करे फिर चाहे शुरुआत छोटे से ही क्यों न हो।  जैसे अभी आप सोचे कि कल मैं सुबह जल्दी उठूंगा/उठूंगी या कोई भी ऐसा काम जिसपर आप सुधार या महारत पाना चाहते हैं, और अगले दिन उसे हकीकत में बदलिए। 

कुछ समय लगेगा लेकिन अगर आपकी लगन सच्ची है और वजह जीने-मारने से बड़ी है तो यकीन मानिए सफलता के लिए एक ख्याल भी नही आएगा बल्कि बस आपको लत लग जायेगी उस काम की जिसे हर दिन आप पहले से बेहतर बनाने की कोशिश करेंगे। सफलता आपके पीछे होगी न की आप सफलता के पीछे। 

मेरा ऐसा मानना है , बाकी Tenson Not एक गुरु हमारी Nature माता खुद है। सोच कर, प्लान कर, समय रहते  मेहनत नही करोगे तो जिंदगी सब खुद ब खुद सीखा देगी भले देर से ही। 

" सफलता बाजार में मिलती है , मुझे मिल सकती है, तुम्हे मिल सकती है, 

हर किसी को मिल सकती है, जो इसका भाव देने को तैयार है। "

जैसे मेरा Interest है लिखने में और ये पोस्ट मैं रात के 3 बजे लिख रहा हूँ वैसे ही Comment - Box  में जरूर बताये की आपको क्या पसंद है और अगले 1 साल में आप खुद को कहा देखते हैं।  

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